दुनिया के सबसे बड़े पालतू मगरमच्छ की मौत
सिडनी । ऑस्ट्रेलिया में 18 फीट लंबे पालतू मगरमच्छ की मौत हो गई। यह दुनिया का सबसे बड़ा कैदी मगरमच्छ था। इसे कैसियस नाम दिया गया था। इंसानों की कैद में मौजूद सबसे बड़े मगरमच्छ का विश्व रेकॉर्ड कैसियस के नाम था। ऑस्ट्रेलियाई वन्य जीव अभ्यारण्य ने इस विशालकाय पालतू मगरमच्छ की मौत की पुष्टि की। कैसियस की उम्र 110 साल से ज़्यादा थी। मैरिनलैंड मेलानेशिया क्रोकोडाइल हैबिटेट ने बताया कि कैसियस का वजन एक टन से ज्यादा था और 15 अक्टूबर से ही उसकी सेहत में गिरावट आ रही थी। क्वींसलैंड के पर्यटक शहर केर्न्स के पास ग्रीन आइलैंड पर स्थित संगठन की एक पोस्ट के अनुसार, वह बहुत बूढ़ा था और माना जा रहा था कि वह जंगली मगरमच्छ से ज़्यादा उम्र तक जी रहा था। वन्य जीव अभ्यारण्य ने कहा, कैसियस की बहुत याद आएगी, लेकिन उसके प्रति हमारा प्यार और यादें हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी। समूह की वेबसाइट ने कहा कि वह 1987 से ही इस अभ्यारण्य में रह रहा था। उसे पड़ोसी उत्तरी क्षेत्र से लाया गया था, जहां मगरमच्छ इस क्षेत्र के पर्यटन उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कैसियस एक खारे पानी का मगरमच्छ था। उसके नाम कैद में दुनिया के सबसे बड़े मगरमच्छ के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का खिताब था। गिनीज के अनुसार, उसने फिलीपींस के मगरमच्छ लोलोंग की 2013 में मृत्यु के बाद यह खिताब जीता था, जिसकी लंबाई 20 फीट 3 इंच थी।

PM मोदी ने बताया क्यों रखा PMO का नाम ‘सेवा तीर्थ’, जानिए इसके पीछे की सोच
हाईवे की एयरस्ट्रिप पर उतरा नरेंद्र मोदी का विमान, ऐसा करने वाले पहले पीएम बने
बागेश्वर धाम में सजा विवाह मंडप, धीरेंद्र शास्त्री ने मोहन यादव को लगाई परंपरा की हल्दी
चाकसू में NH-52 पर भीषण हादसा: ट्रेलर में घुसी कार, एमपी के 5 श्रद्धालुओं की मौत
नरेंद्र मोदी ने पुलवामा शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले– उनका साहस हर भारतीय को करता है प्रेरित
छत्तीसगढ़ के राशन कार्डधारकों के लिए खुशखबरी… इस दिन से मिलेगा एक साथ 2 महीने का चावल
विकास का दम: छिंदवाड़ा ने बनाई अलग पहचान, पीएम की गुड लिस्ट में पहला स्थान
बाबा महाकाल के दर्शन होंगे आसान, भोपाल-उज्जैन के बीच चलेंगी 3 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें, जानिए रूट और शेड्यूल
सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से असंगठित ज्वैलर्स की बिक्री में गिरावट, जानें क्या है वजह
बेरहम बाजार: क्या एआई निगल जाएगा भारत की आईटी कंपनियों का भविष्य? 4.5 लाख करोड़ रुपये हवा हुए, अब आगे क्या?