बगावत के सुर: केंद्रीय मंत्री से मिली TMC की बागी सांसद
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचा घमासान अब कोलकाता की गलियारों से निकलकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, लेकिन उससे ठीक पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बहुत बड़ा झटका लगने के संकेत मिल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीएमसी के नाराज और बागी सांसदों का एक बड़ा गुट दिल्ली में एक केंद्रीय मंत्री के संपर्क में है, जिससे पार्टी में एक और बड़ी टूट की आशंका गहरा गई है।
लोकसभा सांसदों में अलग गुट बनाने की हलचल
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी की नीतियों और कार्यशैली से असहमत टीएमसी के कई सांसद अब संसद में अपना एक अलग गुट बनाने की संभावनाओं पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं। सोमवार को दिल्ली में हुई एक गुप्त बैठक में तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सारेन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती शामिल हुए। इन सांसदों की आपसी बैठक ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर लोकसभा स्तर पर भी बगावत देखने को मिल सकती है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात का सच
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी भारी चर्चा है कि लोकसभा में टीएमसी के कुल 29 सांसदों में से 14 सांसदों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। कुछ अपुष्ट मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहाँ तक दावा किया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां मौजूद थे। हालांकि, अभी तक इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इसे बंगाल की राजनीति में आने वाले किसी बड़े सियासी तूफान का साफ संकेत माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी इस संकट से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाती हैं।
विधानसभा के बाद अब संसद में भी बिखराव का खतरा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी लगातार आंतरिक संकट से जूझ रही है। राज्य विधानसभा में टीएमसी के 60 विधायकों ने पहले ही अपनी ही पार्टी से अलग होकर एक नया समूह बना लिया है। इस नाराज धड़े ने ममता बनर्जी द्वारा तय किए गए नेता के बजाय ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में अपना नेता चुन लिया है। हालांकि, हाल ही में इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने साफ किया है कि उनका इस्तीफा इस विधायक गुट की घटना से अलग है क्योंकि उन विधायकों ने अभी अपनी सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है।
सांसदों की बगावत से बदलेंगे समीकरण
बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि उनके साथ 80 में से 61 विधायकों का मजबूत समर्थन है। अब ताजा रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि पार्टी के करीब 23 लोकसभा और राज्यसभा सांसद भी इस बागी गुट के लगातार संपर्क में बने हुए हैं। नियमों के मुताबिक, लोकसभा में दल-बदल कानून से बचते हुए एक अलग दल के रूप में मान्यता पाने के लिए टीएमसी के कम से कम 22 सांसदों का एक साथ आना जरूरी है। अगर बागी सांसदों की संख्या 22 या उससे पार हो जाती है, तो संसद के भीतर टीएमसी दो धड़ों में बंट जाएगी, जो पार्टी के अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट होगा।

भोपाल में राजनीतिक घमासान, भाजपा नेताओं को पुलिस ने रास्ते में रोका
कश्मीर में फिर आतंक का हमला, अनंतनाग में पुलिस जवान की शहादत
सूना घर देख चोरों ने खेला खेल, अमरनाथ यात्रा पर गई महिला के मकान में लाखों की चोरी
संसद में विवाद के बाद कल्याण बनर्जी पर गिरी गाज, पूरे मानसून सत्र से बाहर
बस की टक्कर से दो की मौत, आक्रोशित लोगों ने सड़क पर किया हंगामा
कानपुर में वकीलों का उग्र प्रदर्शन, डीएम कार्यालय के गेट पर किया घेराव
जिम्बाब्वे ने खोले अपने पत्ते, सीरीज से पहले टीम का ऐलान; त्सिगा को मिला मौका
वृंदावन में विराट-अनुष्का की सादगी ने जीता दिल, नंगे पैर प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने पहुंचे
'ऐसे नहीं चलेगा...' रीवा कलेक्टर ने वेंडर को सुनाई खरी-खरी, मामला हुआ वायरल