सारंगपुर अनुविभाग में जल परिरक्षण अधिनियम कागजो तक सीमित:
नलकूप खनन पर प्रतिबंध तो बोरवेल मशीनों के प्रवेश पर प्रतिबंधत क्यूं नही?
नलकूप खनन प्रतिबंधित फिर भी अनुविभाग क्षेत्र में हर दिन आधा दर्जन से ज्यादा हो रहे खनन।
 न्यूज, सारंगपुर।
बीते वर्षा ऋतु के सीजन में जिले और सारंगपुर अनुविभाग में सामान्य वर्षा से भी कम वर्षा रिकार्ड की गई थी। आगामी मुश्किल हालातों से बचने के लिए सावधानी बरतते हुए जिला कलेक्टर डा. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा जिले में परिरक्षण अधिनियम के अंतर्गत बिना अनुमति के निजी तौर पर किए जाने वाले नलकूप खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन सारंगपुर अनुविभाग में कलेक्टर श्री मिश्रा द्वारा लगाया गया प्रतिबंध और आदेश कागजों तक सिमटा नजर आ रहा है। क्योंकि क्षेत्र में जिस तरह खनन करने वाली बोरवेल मशीने खुलेआम घुम रही है और रात्रिकालीन समय में प्रतिदिन लगभग आधा दर्जन स्थानों पर उनके द्वारा बकायदा अवैध रूप सें नलकूप खनन भी किया जा रहा है। यह अवैध खनन प्रशासन की निष्क्रयता और नीचले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर स्पष्ट इशारा करता है।
पूर्णत: प्रतिबंध बेअसर
कम वर्षा और तेजी से गिरते भू-जल स्तर के मद्देनजर अनुविभाग क्षेत्र को जल अभाव ग्रस्त तो घोषित कर दिया गया और कागजो में बोरवेल खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध भी लगा दिया गया मगर वास्तविक धरातल पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होने से नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही है। गौरतलब है कि क्षेत्र में एजेंटों और प्रशासनिक अमले की सांठगांठ के चलते प्रतिबंध के बावजूद बोरवेल खनन जोरों पर चल रहा हैं। मजे की बात तो यह है कि बोर खनन के लिए प्रशासन से अनुमति लेना जरूरी है। जो लोग अनुमति नहीं लेते, उनके यहां बोर खनन आसानी से हो रहा है जबकि जो लोग अनुमति की चाह रखते हैं, वे राजस्व कार्यालय के चक्कर काटते रह जाते हैं। उन्हें परमिशन तो नहीं मिलती, बल्कि कार्यालयो के चक्कर काटना मिलता है। अंत में जाकर उन्हें एजेंटो से चर्चा करनी पड़ती है और 2 से 5 हजार रूपए अतिरिक्त रिश्वत देकर उनका काम आसानी से हो जाता है।
हर दिन रात्रि में हो रहे आधा दर्जन अवैध नलकूप खनन
अनुविभाग सारंगपुर के ग्रामीण अंचलों सहित नगर के आसपास ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिबंध के बाद भी बिना रोकटोक नलकूप खनन का सिलसिला चल रहा है। लोग बिना अनुमति के खनन कर आदेशों की धज्जियां उडा रहे हैं। इन दिनों क्षेत्र में बडी संख्या में बोर खनन करने वाली मशीनंि देखी जा रही है। इनके दलाल खुलेआम इस काम को अंजाम देने में लगे हैं। गौरतलब है कि जिस भू जल स्तर को बचाने के लिए नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया है और जिन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई है वह जिम्मेदार ही इसकी मॉनीटरिंग नहीं कर रहे है और अवैध तरीके से बोर खनन करने वालों की चांदी हो गई है।
हर 10 किलोमीटर पर मिल जाएंगे बोरवेल
सारंगपुर अनुविभाग में जल परिरक्षण अधिनियम लागू हैं, लेकिन स्थिति यह हैं कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया जाए तो हर 10 किमी पर दो दो बोरवेल मिल जाएंगे। बोरवेल खनन माफिया इतने शातिर हैं कि दिन में बोरवेल बंद रखते है, जैसे ही रात होती है खनन चालू हो जाता है। बाकायदा बोरवेल पाइंट पर लगने से पहले राजस्व व पुलिस अधिकारियों के नाम से प्रति पाइंट पर रुपए बढा दिए जाते हैं।
प्रति फिट पर 20 रूपए अतिरिक्त हो रही वसूली
सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार सारंगपुर अनुविभाग क्षेत्र में आमतौर पर 130 से 140 रूपए प्रति फिट में किया जाने वाला नलकूप खनन अब अवैध रूप से मनमाने दामों में किया जा रहा है। जबकि प्रतिबंध में दौरान अवैध रूप से किए जा रहे खनन में एजेंट अधिकारियों के नाम पर 130 से 140 रूपए प्रति फीट से बढाकर किसान से 150 से 160 रुपए प्रति फीट के मान से वसूले जा रहे हैं।  
बोले जिम्मेदार
जल परिरक्षण अधिनियम लागू होने के कारण बोरवेल खनन के लिए अनुमति नहीं दी जा रही हैं। तहसील क्षेत्र में बिना अनुमति के बोरवेल खनन की जानकारी आपके माध्यम से मिली है। जरूरत पड़ी तो मशीनो के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएंगे।
आकाश शर्मा, तहसीलदार, सारंगपुर
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