सहकारी बैंक का ऋण संबंधित ऋणी के खसरे में दर्ज हों जिन खसरों पर ऋण दर्ज है उस जमीन का रजिस्ट्री पर नामांतरण नहीं हो सहकारी बैंक के ऋण पारदर्शिता से जमीन के खसरों में इन्द्राज करने की जरूरत -कलेक्टर
सहकारी बैंक का ऋण संबंधित ऋणी के खसरे में दर्ज हों
जिन खसरों पर ऋण दर्ज है उस जमीन का रजिस्ट्री पर नामांतरण नहीं हो
सहकारी बैंक के ऋण पारदर्शिता से जमीन के खसरों में इन्द्राज करने की जरूरत
-कलेक्टर
राजगढ //
कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने सहकारी बैंक द्वारा किसानों को दिए गए ऋण अनिवार्य रूप से उनकी जमीन के खसरों में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने से ऋणी व्यक्ति अपनी जमीन को बगैर ऋण चुकाये बेच नहीं सकेगा। साथ ही ऋण वसूली में भी सुगमता होगी।
गुरुवार को आयोजित जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अमले की बैठक में उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक द्वारा ऋणों की खसरा एवं कृषक वार जानकारी उपलब्ध कराई जाए। कलेक्टर सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऋणी किसानों की जानकारी उनकी जमीनों के खसरों में दर्ज कराना सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने कहा कि सहकारी बैंक द्वारा दिए गए ऋण की जानकारी के आकड़ों का पूरा जिले का डेटा आसानी से उपलब्ध हो। जो जमीन दृष्टि बंधक है उनकी जानकारी भू-अभिलेख पोर्टल पर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जमीनों पर ऋण दर्ज है उनका रजिस्ट्री के माध्यम से अन्य व्यक्ति को नामातरण नहीं किया जाए।
बैठक में कलेक्टर ने समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि जिले के ऋणी किसान ऋण चुकाने से बचने के लिए पडोसी राज्य की कृषि उपज मंडियों अथवा व्यापारियों को गेहूं नहीं बेचें। इसके लिए पडोसी राज्य के जिलों की मंडियों एवं अधिकारियों से संपर्क कर समन्वय बनाया जाये। इसके अलावा शामिलात खाते के नाम पर अऋणी खातेदार का पंजीयन करा कर ऋणी किसान उसके नाम पर गेहूं नहीं बेच सके यह भी सुनिश्चित जाए। उन्होंने कहा गेहूं उपार्जन के पंजीयन पोर्टल पर किसान के ऋण की प्रवृष्टि अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए।
बैठक में बताया गया कि समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी केन्द्रों में 19947 पंजीकृत कृषको में से 9621 कृषकों की राशि 37.45 करोड़ रूपये की ऋण प्रविष्टि की गई है जोकि संतोषजनक नहीं होने के कारण क्रमश: शाखा राजगढ़, खुजनेर एवं ब्यावरा के शाखा प्रबंधकों की एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का दण्ड दिया गया तथा 60 प्रतिशत से कम प्रविष्टि वाली शाखाओं सहित मुख्यालय के अधिकारियों के वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। न्यूनतम काम करने वाली शाखाओं के जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच हेतू निर्देशित किया गया। इसी प्रकार 14 शाखाओं में 130408 कृषकों में से 91506 कृषकों की भू अभिलेख पोर्टल पर प्रविष्टि की गई। 39505 कृषको की प्रविष्टि होना शेष है। 07 दिवस में शतप्रतिशत भूअभिलेख पोर्टल पर प्रविष्टि हेतु निर्देशित किया गया है ।

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