मेडिकल स्टोर्स संचालकों की मनमानी, निरीक्षण का अभाव। बिना बिल दिए बेची जा रही है दवाईयां।
मेडिकल स्टोर्स संचालकों की मनमानी, निरीक्षण का अभाव। बिना बिल दिए बेची जा रही है दवाईयां।
सारंगपुर
यदि आप किसी मेडिकल स्टोर पर जाएं और वहां से दवा खरीदे तो मेडिकल स्टोर पर जितने रुपए आपको बताया आपको वह चुकाना ही होगा। सारंगपुर शहरी क्षेत्र में केवल कागज पर पर बिल बनाकर मेडिकल संचालको द्वारा ग्राहकों को दिया जाता है। इससे ग्राहकों का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यदि दवा का मूल्य अधिक है तो वह क्लेम करने की भी स्थिति में नहीं रहते। मेडिकल स्टोर संचालक कागज पर हाथ से पर्ची लिखते है और रुपए का टोटल बनाकर ग्राहकों को दे रहे हैं। इससे ग्राहकों का भी शोषण हो रहा है वहीं मेडिकल संचालकों की चांदी है। कोई यदि दवा का पर्चा लेकर क्लेम करना चाहे तो उसके पास कोई सबूत नहीं रहता की उसने उक्त मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी है। यह सिर्फ नगर के मेडिकलों पर ही नहीं हो रहा है बल्कि क्षेत्र भर के मेडिकल स्टोर पर ग्राहकों की आंखों में जबरदस्त धूल झोंकी जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर ने महीनों से क्षेत्र में निरीक्षण नहीं किया।
इसलिए नहीं देते पक्का बिल :
मेडिकल संचालकों की यह मनमानी लंबे समय से चल रही है। अधिकांश दवाएं और एंटीबायोटिक सिर्फ काउंटर सेल पर ही दिए जा रहे हैं। दरअसल दुकानदार पक्का बिल देने से इसलिए बचते हैं क्योंकि यदि वह पक्का बिल देंगे तो रेट पकड़ में आ जाएंगे। मेडिकल स्टोर संचालित करने का नियम यह है कि सभी मेडिकल स्टोरों पर बिल के लिए कंप्यूटर की व्यवस्था होनी चाहिए और कितनी दवा की बिक्री हुई इसकी भी एंट्री होनी चाहिए लेकिन किसी भी मेडिकल स्टोर पर कंप्यूटर की सुविधा नहीं है। ग्राहकों को सिर्फ कागज के पर्चे पर दवा के रेट लिखकर दे दिए जाते हैं। ग्राहक भी अनभिज्ञता के कारण पक्का बिल नहीं ले पाते।
किसी भी मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट नहीं :
ज्ञात हो कि शहर के अधिकतम मेडिकल स्टोरो में फार्मासिस्ट नहीं है। नॉन मेडिको बेरोकटोक पर्चे पर दवाएं दे रहे हैं लेकिन इन सब पर निगाह रखकर कार्यवाही करने वाला स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है। हालांकि हाल ही में स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कुछ मेडिकल स्टोर्स पर निरीक्षण कर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई करने की बात कही थी। बावजूद इसके नियमों को ताक पर रखकर मेडिकल स्टोर संचालित किए जा रहे हैं। कई मरीज तो ऐसे हैं जो डॉक्टर के क्लीनिक पर जाने की बजाय सीधे मेडिकल संचालक से मर्ज का परामर्श लेते देखे जा सकते हैं। वहीं कुछ डॉक्टर ने अपने मेडिकल स्टोर स्वयं संचालित कर रखे हैं। कुछ मेडिकल स्टोर ऐसे हैं जहां लाइसेंस की कॉपी चस्पा नहीं है।

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