समस्याओं से घिरते जा रहे विद्यार्थी, महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की दरकरार प्रतिनिधि न होने से विद्यार्थियों को हो रही परेशानी, छात्रों की मांग पर नहीं ध्यान।
समस्याओं से घिरते जा रहे विद्यार्थी, महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की दरकरार
प्रतिनिधि न होने से विद्यार्थियों को हो रही परेशानी, छात्रों की मांग पर नहीं ध्यान।
सारंगपुर//
कालेज विद्यार्थियों की समस्याओं की लिस्ट लंबी होती जा रही है। आए दिन विद्यार्थी कभी शासकीय स्वामी महाविद्यालय तो कभी कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली से परेशान हो रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रतिनिधि की सख्त जरूरत है, जो उनकी बात समय समय पर रख सके। दूसरी ओर शासन विद्यार्थियों को उनका प्रतिनिधि देने को तैयार नहीं है। ऐसे में राजनीति की पहली सीढी छात्रसंघ चुनाव की मांग भी ठंडी पड चुकी है। सूत्रों की माने तो इसकी आवश्यकता को देखते हुए एक बार फिर छात्र संगठन प्रदर्शन के मूड में हैं। सात साल से कॉलेज विद्यार्थियों को अपनी सरकार चुनने का मौका नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर राजनीति में पृष्ठभूमि तलाशने वाले छात्रों के लिए छात्रसंघ चुनाव अहम होते हैं। ऐसे में यह चुनाव उनके भविष्य का भी फैसला करते हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि इन सबको देखते हुए छात्रसंघ चुनाव जल्द से जल्द कराए जाने की मांग की जाएगी।
कमलनाथ सरकार ने की थी घोषणा
मध्यप्रदेश में कई सालों से छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहे है। हालांकि वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन मामला प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रणाली के बीच उलझकर रह गया। ज्ञात हो कि कॉलेज में पहले प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव हुआ करते थे। इसी प्रणाली से राजनीति के क्षेत्र में कई चर्चित चेहरे आए है। धीरे धीरे चुनाव नेताओं के प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गए और उपद्रव होने लगे। ऐसे में कॉलेज में चुनाव होने बंद हो गए। वर्ष 2017 में शिवराज सरकार ने छात्र संघ चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए थे। कॉलेजों में ही मेरिट के आधार पर नेताओं को चुना गया था।
कालेज नेताओं ने रखी अपनी बात
छात्रसंघ चुनाव की अब सख्त आवश्यकता है। इतिहास गवाह है कि छात्र राजनीति ने ही देश को बडे नेता दिए हैं। चुनाव होंगे तभी विद्यार्थी बिना परेशानी के अध्ययन कर पाएंगे।
शुभम शर्मा, संयोजक, एबीवीपी।
सरकार चाहती है कि विद्यार्थी सड़क पर उतर जाएं और सरकार के खिलाफ आंदोलन करें। जल्द ही छात्रसंघ चुनाव की घोषणा नहीं हुई तो हम लोग जरूरत पड़ने पर उग्र आंदोलन करेंगे।
तोसीफ मेव, जिला उपाध्यक्ष, एनएसयूआई।
छात्रसंघ चुनाव होना चाहिए। प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव होने पर छात्रों को प्रतिनिधि मिलेगा। कई विद्यार्थी राजनीति में कॅरियर बनाना चाहते हैं। चुनाव उनके लिए सीढ़ी है।
आदित्य शर्मा, नगर मंत्री, एबीवीपी।
प्रदेश में छात्र राजनीति को दफन किया जा रहा है। छात्रसंघ चुनाव युवा नेताओं के भविष्य का फैसला करते हैं। छात्र राजनीति से ही कई नेता बडे मुकाम पर पहुंचे हैं। सरकार को जल्द ही चुनाव कराना चाहिए।
पवन राज, ब्लाक अध्यक्ष, एनएसयूआई।
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