सरकारी सेवा में लापरवाही? मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के कई वरिष्ठ और जूनियर डॉक्टरों पर सरकारी ड्यूटी के दौरान मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर निजी चिकित्सालयों (प्राइवेट अस्पतालों) में अपनी सेवाएं देने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे कृत्य को मेडिकल कॉलेज और जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन दोषी चिकित्सकों के खिलाफ अब निलंबन और विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी गई है।
OPD-IPD छोड़ प्राइवेट क्लीनिकों में व्यस्त हैं सरकारी डॉक्टर, डीन ने जताई नाराजगी
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अविनाश मेश्राम ने इस संबंध में एक कड़ा आधिकारिक पत्र जारी करते हुए बताया है कि अस्पताल के कुछ डॉक्टर ओपीडी (OPD) और आईपीडी (IPD) में अपनी निर्धारित शासकीय जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं कर रहे हैं। इन डॉक्टरों पर आरोप है कि वे सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए तड़प रहे गरीब मरीजों की देखभाल छोड़कर निजी नर्सिंग होम और कॉर्पोरेट अस्पतालों में मोटी रकम के लिए कार्य कर रहे हैं। इस वजह से शासकीय अस्पताल में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
डीन डॉ. मेश्राम ने इस पूरे गोरखधंधे से सरगुजा कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों तथा उच्च प्रशासनिक अमले को लिखित रूप में अवगत करा दिया है। जारी पत्र में साफ कहा गया है कि इन डॉक्टरों को पूर्व में भी मौखिक और लिखित रूप से चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी कार्यप्रणाली और आदतों में कोई अपेक्षित सुधार नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय सेवा के नियमों का उल्लंघन कर निजी संस्थानों में प्रैक्टिस करने वाले किसी भी चिकित्सक को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी एक्शन लिया जाएगा।
सरकारी अस्पतालों से निजी नर्सिंग होम में मरीज रेफर करने का बड़ा खेल उजागर
छत्तीसगढ़ शासन की ओर से सरकारी डॉक्टरों की इस मनमानी को लेकर पहले ही कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने भी जिले के सभी डॉक्टरों के लिए कड़ा फरमान जारी कर निर्धारित ड्यूटी का कड़ाई से पालन करने को कहा था।
इसके बावजूद, अंबिकापुर के कई रसूखदार निजी अस्पताल लगातार नियमों को ताक पर रखकर सरकारी डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों की सेवाएं ले रहे हैं। शहर के रायगढ़ रोड स्थित एक बड़े निजी अस्पताल के अलावा अन्य इलाकों में स्थित नर्सिंग होम में ये सरकारी डॉक्टर धड़ल्ले से ऑन-कॉल और पार्ट-टाइम ड्यूटी कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये डॉक्टर सरकारी अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को बहला-फुसलाकर या डराकर उन्हीं निजी अस्पतालों में रेफर कर देते हैं, और फिर खुद वहां पहुंचकर उनका महंगा इलाज व ऑपरेशन करते हैं।
प्राइवेट अस्पतालों को देना होगा शपथ पत्र, नियम तोड़ने पर बंद होंगे अस्पताल
इस नेक्सस को तोड़ने के लिए सरगुजा जिले के सीएमएचओ ने अब एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी निजी अस्पताल संचालकों से एक अनिवार्य कानूनी शपथ पत्र (Affidavit) मांगना शुरू कर दिया है।
इस शपथ पत्र में साफ तौर पर यह शर्त रखी गई है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पंजीकृत सभी निजी अस्पताल लिखित में यह घोषणा करेंगे कि उनके यहां कोई भी शासकीय चिकित्सक पूर्णकालिक, अंशकालिक या ऑन-कॉल रूप से उपस्थित होकर प्रैक्टिस नहीं करता है। यदि जांच में किसी भी निजी अस्पताल में सरकारी डॉक्टर सेवा देते हुए पाया गया, तो उस अस्पताल का लाइसेंस तुरंत सस्पेंड या रद्द कर दिया जाएगा। इसी अनिवार्य शर्त और शपथ पत्र को जमा करने के बाद ही निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को भर्ती करने और सरकारी फंड का लाभ लेने का अधिकार दिया जाएगा।

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