भोपाल। मध्य प्रदेश में एक बार फिर से मानसून की झमाझम गतिविधियों ने जोर पकड़ लिया है। राज्य के ऊपर बने प्रभावी मानसून ट्रफ और एक नए शक्तिशाली मानसूनी सिस्टम के असर से मौसम पूरी तरह से बदल गया है, जिसके चलते सोमवार को भी प्रदेश के तमाम हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग की तरफ से जारी ताजा चेतावनी के अनुसार अगले चौबीस घंटों के दौरान राज्य के कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा होने के पूरे आसार बने हुए हैं, जिससे किसानों और आम जनजीवन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सतना और बैतूल समेत आठ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के करीब आठ प्रमुख जिलों में भारी बारिश होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जारी की है। जिन जिलों के लिए यह विशेष सतर्कता बरती जा रही है उनमें मुख्य रूप से सतना, कटनी, उमरिया, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, रायसेन और बैतूल शामिल हैं। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन चुनिंदा क्षेत्रों में अगले चौबीस घंटों के भीतर लगभग चार इंच या उससे भी अधिक पानी गिर सकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन को भी मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राजधानी भोपाल समेत दर्जनों जिलों में बरसेंगे बदरा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार की सुबह से ही बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बारिश का दौर शुरू हो गया है। इसके अलावा भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, धार, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के तमाम जिलों में भी हल्की से लेकर मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर तेज बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है, जिससे पूरे प्रदेश में मौसम सुहावना हो गया है।

सामान्य से अभी भी सत्रह प्रतिशत कम है वर्षा का आंकड़ा

मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इस मौजूदा मानसून सत्र के दौरान राज्य में अब तक औसतन लगभग 336.7 मिलीमीटर यानी करीब साढ़े तेरह इंच बारिश ही दर्ज की जा सकी है। जबकि सामान्य मौसमी मानकों के अनुसार इस समयावधि तक करीब 407 मिलीमीटर पानी गिर जाना चाहिए था। इस हिसाब से देखा जाए तो प्रदेश में अभी भी लगभग 17 प्रतिशत पानी की कमी बनी हुई है, जिसमें पूर्वी हिस्से में 20 फीसदी और पश्चिमी हिस्से में 15 फीसदी की गिरावट दर्ज है।

आगामी दिनों में मानसूनी सिस्टम के असर से और तेज होगी बारिश

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ गहरा कम दबाव का क्षेत्र अब पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा के तटीय इलाकों के पास पहुंच चुका है। यह मौसमी तंत्र आगे बढ़ते हुए झारखंड और छत्तीसगढ़ के रास्ते होते हुए मध्य भारत के ऊपर से गुजरेगा। इसके प्रभाव से आगामी अठारह से तीस जुलाई के दौरान मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने के प्रबल योग हैं, जिससे बारिश के इस कोटे की कमी के काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है।