मध्य प्रदेश विधानसभा ने दी मंजूरी, महिलाएं अब कर सकेंगी नाइट शिफ्ट
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में श्रम संशोधन एवं प्रकीर्ण 2025 बहुमत से पारित कर दिया गया. इससे जहां श्रमिकों को फायदा मिलेगा, वहीं यह विधेयक औद्योगिक संस्थानों और दुकानदारों के हित में भी है. इस विधेयक को श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने सदन में रखा था. इसमें खास बात यह है कि अब महिलाओं को भी औद्योगिक संस्थानों और दुकानों में नाइट शिफ्ट करने की छूट होगी. यानि अब महिलाएं निजी संस्थानों में भी रातभर काम कर सकेंगी.
90 दिन में 144 घंटे ओवर टाइम की छूट
नए श्रम कानून में श्रमिकों और संस्थानों को ओवर टाइम में भी छूट दी गई है. अब तक जहां श्रमिक एक सप्ताह मेें 7 घंटे ओवर टाइम कर सकता था. वहीं नए कानून के तहत श्रमिक 3 महीने यानि करीब 90 दिन में 144 घंटे ओवर टाइम कर सकेंगे. मंत्री पटेल ने बताया कि, ''यदि आप एक दिन में 12 घंटे काम करते हैं, तो आप 4 दिन में ही उतने घंटे पूरे कर लेंगे. उससे ज्यादा करेंगे तो दोगुना वेतन मिलेगा. यदि 5 दिन भी 10 घंटे काम करते हैं, तो 48 घंटे से ज्यादा समय हो जाता है.''
पटेल ने कहा, सिफ महिला शब्द हटाया
मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि, ''औद्योगिक श्रम संशोधन कानून उद्योग और दुकानों दोनों के लिए है. यह एक साइकिल है, जिसे और रिलैक्स किया गया है. यह जितना जरुरी मजदूरों के लिए है, उतनी ही उद्योग और दुकानदारों के लिए है.'' मंत्री ने कहा कि, ''अब तक श्रम कानून में महिलाओं को रात में काम करने पर बंधन था. अधिनियम में एक शब्द महिला लिखा हुआ था. जिसे अब हटा दिया गया है. जिससे दोनों के बीच समानता का भाव पैदा हो सके.''
अब तक यह था ओवर टाइम का नियम
दरअसल, ओवर टाइम का मतलब है कि नियमित कार्य घंटों से अधिक घंटे कार्य करना. ऐसे में श्रम कानून के तहत अब तक श्रमिकों से एक दिन में 10 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकता था. यानि 9 घंटे प्रतिदिन और एक घंटे का ओवरटाइम. यदि कर्मचारी नियमित घंटों से अधिक काम करता है, तो उस समय का उसे दोगुना पेमेंट देना होता है. साथ ही नियम में यह भी स्पष्ट है कि इस बीच श्रमिकों को कम से कम आधे घंटे का ब्रेक भी दिया जाना चाहिए. वहीं सपूर्ण कार्य दिवस की गणना इस प्रकार होनी चाहिए कि कार्य अवधि बिना अंतराल के 5 घंटे से अधिक न हो.
नियोक्ताओं को भी करने होंगे ये इंतजाम
नाइट शिफ्ट के लिए महिला कर्मचारियों से सहमति लेनी होगी.
महिलाओं को मातृत्व अवकाश का लाभ देना होगा.
महिला कर्मचारी को घर से संस्थान और वापस घर छोड़ने की जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी.
कार्य स्थल पर रोशनी और सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए.
महिलाओं के कार्य स्थल पर सुरक्षा गार्ड मौजूद होना चाहिए.
लैंगिंक उत्पीड़न निवारण अधिनियम के नियमों का पालन करना होगा.
जिस जगह महिलाआएं रात में काम करेंगी, वहां कम से कम 10 महिलाएं होनी चाहिए.
साथ ही कारखाने या प्रोडक्शन यूनिट में काम करने के दौरान सुपरवाइजर और अन्य कर्मचारी कम से कम एक तिहाई होने चाहिए.

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