बैंक धोखाधड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव, SC ने दिया बड़ा निर्णय
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि लोन लेने वाले शख्स को अपना खाता धोखाधड़ी वाला घोषित किए जाने से पहले बैंक द्वारा व्यक्तिगत सुनवाई का अधिकार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उधारकर्ता को उस फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट को प्राप्त करने का अधिकार है, जिसके आधार पर बैंक द्वारा कार्रवाई की गई थी।
मंगलवार को जस्टिस जेबी पादरीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने पिछले तीन वर्षों में सार्वजनिक रकम के 67,226 करोड़ रुपये से जुड़े 73, 507 बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में व्यक्तिगत मौखिक सुनवाई देना व्यावहारिक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
बेंच ने कहा कि बैंकों द्वारा अकाउंट को धोखाधड़ी वाला अकाउंट घोषित करने से पहले कारण बताओ नोटिस भेजा गया और उधारकर्ताओं को जवाब देने के लिए पर्याप्त समय दिया गया। पीठ ने स्पष्ट किया कि बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली यह प्रक्रिया निष्पक्षता की आवश्यकताओं को पूरा करती है और न्याय के उल्लंघन को भी रोकती है।
पीठ ने कहा, धोखाधड़ी का वर्गीकरण मुख्य रूप से वित्तीय विवरण, लेनदेन रिकॉर्ड, स्टॉक विवरण और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों जैसे दस्तावेजी सबूतों पर आधारित होता है।अदालत ने कहा, मौखिक सुनवाई से एक त्वरित प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी खिंच जाएगी, जिससे इसका मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। इससे रसद पर भी काफी बोझ पड़ेगा। साथ ही उधारकर्ताओं को संपत्ति को नष्ट करने, सबूत मिटाने या फरार होने का भी अवसर मिलेगा, जिससे भारी नुकसान होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया हाई कार्ट का आदेश
फैसला लिखने वाले जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, मौखिक सुनवाई की अनुमति देने से सार्वजनिक धन खतरे में पड़ जाएगा क्योंकि उधारकर्ता बैंकों से ऋण लेते रहेंगे और बैंक कर्मचारियों पर भारी बोझ पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों के उन आदेशों को रद्द कर दिया जिनमें बैंकों को खाताधारक को मौखिक सुनवाई दिए बिना किसी भी खाते में धोखाधड़ी घोषित न करने का निर्देश दिया गया था।

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