भोपाल। राजधानी में मूंग की फसल की सिर्फ एक चौथाई यानी 25 प्रतिशत खरीद की सरकारी नीति के विरोध में अन्नदाताओं का आक्रोश सोमवार को पूरी तरह से उफान पर नजर आया। विभिन्न किसान यूनियनों और संगठनों के आह्वान पर भारी तादाद में किसान राजधानी की तरफ कूच करने के लिए सड़कों पर उतर आए। हालांकि प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए कई जगहों पर लोहे के बैरिकेड्स लगाए और कई प्रमुख किसान नेताओं को ऐहतियातन नजरबंद भी किया, फिर भी अनगिनत किसान अलग-अलग रास्तों से होते हुए नर्मदापुरम की सीमा तक पहुंचने में कामयाब रहे।

सेठानी घाट से शुरू हुआ ऐतिहासिक पैदल मार्च

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े क्रांतिकारी किसान संगठन, भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ और किसान कांग्रेस सहित कुल 13 विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि सुबह ग्यारह बजे नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर एकजुट हुए। वहां किसानों ने मां नर्मदा का पूजन अर्चन करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद अपने इस पैदल मार्च का औपचारिक आगाज किया।

पुलिस के साथ झड़प और बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़े किसान

इस विरोध यात्रा के दौरान प्रशासनिक अमले ने झंडा चौक, इंदिरा चौक और भोपाल तिराहा जैसे कई संवेदनशील बिंदुओं पर अवरोधक लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की पुरजोर कोशिश की। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच हल्की धक्का-मुक्की और तनाव भी देखने को मिला, लेकिन भारी जोश से लबरेज किसानों ने तमाम बाधाओं को दरकिनार करते हुए बैरिकेड्स हटा दिए और अपना सफर जारी रखा। मौके पर मौजूद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को मनाने की कोशिश की, मगर बात नहीं बनी।

बुधनी पहुंचकर भी नहीं थमी किसानों की रफ्तार

नर्मदा ब्रिज के नजदीक ग्राम डोगरवाड़ा में पुलिस प्रशासन द्वारा त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया गया था, जहां भी दोनों पक्षों के बीच कशमकश की स्थिति बनी रही। शाम ढलते-ढलते किसानों का यह कारवां बुधनी जा पहुंचा, जहां ओवरब्रिज पर खड़े किए गए सुरक्षा घेरे और अवरोधों को भी प्रदर्शनकारियों ने हटा दिया और राजधानी की ओर अपनी गति बनाए रखी। आंदोलनकारियों का मुख्य उद्देश्य बुधवार की सुबह तक भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है।

राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुख्ता पहरा

किसानों के इस उग्र आंदोलन और राजधानी कूच के ऐलान को देखते हुए भोपाल प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री निवास के आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील करते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और कई स्तर की बैरिकेडिंग कर सुरक्षा घेरा मजबूत किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हर संभावित मार्ग पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।