खतरनाक हथियारों संग तानाशाह की बेटी, सामने आया चौंकाने वाला दृश्य
उत्तर कोरिया| में तानाशाह किम जोंग उन के नेतृत्व का जश्न मनाने वाला एक सप्ताह तक सत्तारूढ़ दल का सम्मेलन चला। इसके बाद किम जोंग उन ने शीर्ष सरकारी और सैन्य अधिकारियों को नई स्नाइपर राइफलें तोहफे में दीं। राज्य मीडिया ने उनकी बेटी किम जू ऐ की एक तस्वीर को प्रमुखता से दिखाया, जिसमें वह शूटिंग रेंज में निशाना साध रही हैं। किम जोंग की बेटी की लगातार पिता के साथ मौजूदगी से यह अटकलें तेज हो रही हैं कि किम उन्हें भविष्य के नेता के रूप में तैयार कर रहे हैं।इस जश्न में किम की ताकतवर बहन किम यो जोंग की भी मौजूद रहीं, जिन्होंने हाल के वर्षों में वॉशिंगटन और सियोल के प्रति उनकी मुखर प्रवक्ता के रूप में कार्य किया है। कांग्रेस में पदोन्नति के बाद अब वह पार्टी की केंद्रीय समिति की महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उनका नया पद पार्टी के आंतरिक संचालन और प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाली उनकी व्यापक भूमिका का संकेत देता है।
किम जोंग के साथ लगातार बढ़ रही बेटी की मौजूदगी
सरकारी मीडिया द्वारा ली गई तस्वीरों में किम यो जोंग और अन्य शीर्ष अधिकारी किम जोंग उन द्वारा दी गई राइफलों को निशाने पर साधते हुए दिखाई दिए। किम की छोटी बेटी, जिसने अपने पिता के समान भूरे रंग का चमड़े का कोट पहना हुआ था, भी बंदूक को पकड़े हुए दिखाई दी, जबकि बंदूक की नली से धुआं निकल रहा था।नवंबर 2022 में एक लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देने के बाद से 13 वर्षीय किम जू ए अपने पिता के साथ सैन्य प्रदर्शनों, कारखाने के उद्घाटन और सितंबर में बीजिंग की यात्रा सहित कई कार्यक्रमों में शामिल हुई है। बीजिंग में किम जोंग उन ने छह साल में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ अपना पहला शिखर सम्मेलन किया था।
अमेरिका से बातचीत के दरवाजे खुले, लेकिन किम ने रखी ये शर्त
इस साल की बैठकों में किम ने उत्तर कोरिया के परमाणु शस्त्रागार को तेज करने की अपनी योजनाओं पर जोर दिया, जो पहले से ही विभिन्न हथियार प्रणालियों से लैस है। इन्हें अमेरिका और एशिया में अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा माना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कठोर रुख की पुष्टि की।हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखे। प्योंगयांग के पहले के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को लंबे समय से ठप पड़ी बातचीत को फिर से शुरू करने की शर्त के रूप में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को छोड़ देना चाहिए।

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