MNS की बयानबाजी पर विवाद, जैन समुदाय मामला गरमाया
मुंबई: मुंबई की सड़कों पर जैन समुदाय द्वारा बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर उपजा विवाद अब महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। जैन समाज की इस धार्मिक परंपरा का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) द्वारा विरोध किए जाने के बाद अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष और मनसे पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि समाज में दरार पैदा करने और हर बात में बेवजह राजनीति घसीटने से किसी को वोट नहीं मिलने वाला है।
क्या है सफेद पट्टियों का मामला और जैन समुदाय का तर्क?
यह पूरा विवाद जैन साधु-संतों की पदयात्रा से जुड़ा है। जैन परंपरा के अनुसार, जब साधु-संत अपने अनुयायियों के घरों या किसी धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने जाते हैं, तो उनके चलने वाले मार्ग पर सफेद रंग की पट्टियां बनाई जाती हैं। जैन समुदाय का तर्क है कि उनके साधु-संत हमेशा नंगे पैर (पदविहार) चलते हैं। चिलचिलाती धूप में गर्म डामर की सड़क से उनके पैरों को छाले न पड़ें और साथ ही रास्ते में आने वाले छोटे जीव-जंतुओं की रक्षा हो सके (अहिंसा धर्म का पालन), इसी पवित्र उद्देश्य से ये सफेद पट्टियां बनाई जाती हैं।
हाल ही में मुंबई के घाटकोपर, विद्याविहार, दादर, गिरगांव और चर्नी रोड जैसे जैन बहुल इलाकों की सड़कों पर ऐसी सफेद पट्टियां देखी गईं। घाटकोपर पश्चिम स्थित कैलास एवेन्यू सोसायटी के बाहर बनाई गई एक ऐसी ही पट्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया। सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी एंट्री की।
मनसे ने बताया ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’, बीएमसी ने हटाईं पट्टियां
इस मामले को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सबसे पहले बेहद आक्रामक रुख अपनाया। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने दादर इलाके में कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर उतरकर इसका कड़ा विरोध किया और मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से इन्हें तुरंत साफ करने की मांग की। मनसे नेताओं का आरोप है कि सार्वजनिक और सरकारी सड़कों पर बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के इस तरह की पट्टियां बनाना सीधे तौर पर ‘सांस्कृतिक आतंकवाद’ है।
विवाद को बढ़ता देख मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने तुरंत सफाई दी कि सार्वजनिक सड़कों पर इस प्रकार की पेंटिंग या पट्टियां बनाने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद बीएमसी के कर्मचारियों ने कई प्रमुख स्थानों से इन सफेद पट्टियों को मिटा दिया। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन से सवाल पूछे, जिससे यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है।
मुख्यमंत्री फडणवीस की अपील- समाज में वैमनस्य पैदा न करें
पूरे मामले पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि किसी भी समाज को दूसरे समाज के खिलाफ खड़ा करना या उनके बीच नफरत और वैमनस्य पैदा करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर उनके लिए हर किसी की बेतुकी बात पर जवाब देना जरूरी नहीं है। यदि किसी समाज की कोई धार्मिक परंपरा है तो उसे निभाने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही सरकारी नियमों और अन्य समाजों की भावनाओं का भी पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दोनों पक्षों को समझाते हुए कहा, "हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान एक-दूसरे की परंपराओं का आदर करना है। लेकिन परंपरा का पालन करने वालों को भी यह ध्यान रखना होगा कि आम जनता को कोई असुविधा न हो। कुछ लोग केवल चर्चा में बने रहने और राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों को हवा दे रहे हैं, लेकिन जनता सब समझती है और इससे समाज का कोई भला नहीं होने वाला।"

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