सीबीआई ने भूपेश बघेल पर ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले में केस दर्ज किया
ऑनलाइन बेटिंग ऐप केस में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल पर सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है. एफआईआर दर्ज करने के साथ ही सीबीआई ने अपनी पहली जांच के आधार पर कहा कि कि बेटिंग ऐप में भूपेश बघेल कथित लाभार्थियों में से एक हैं. सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कथित तौर पर ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले के लाभार्थियों में से एक थे. यही बात अब सीबीआई ने अपनी FIR में लिखी है.
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
सबीआई ने छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की एफआईआर को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश),धोखाधड़ी (420) और छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम के तहत अपने मामले के रूप में फिर से दर्ज किया है. बघेल को एफआईआर में 19 में से आरोपी नंबर 6 के रूप में शामिल किया गया है.
बघेल ने सीबीआई के आरोपों से किया इनकार
सीबीआई केस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने सभी आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने सीबीआई की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है.
सीबीआई ने मार्च में बघेल के यहां मारा था छापा
सीबीआई ने 26 मार्च को छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के रायुपर और दुर्ग के आवास पर छापा मारा था. इस दौरान कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के यहां भी रेड पड़ी थी. इस केस में सीबीआई ने पिछले साल 18 दिसंबर को एफआईआर दर्ज की और 26 मार्च को बघेल के आवास पर तलाशी ली. अब सीबीआई ने इस केस में एफआईआर मंगलवार को सार्वजनिक की गई.
किस आधार पर सीबीआई ने दर्ज किया केस ?
राज्य सरकार की तरफ से जो सीबीआई जांच की अनशुंसा की गई थी. जिसके तहत सीबीआई को भेजे गए मामलों में प्रक्रिया के अनुसार, एजेंसी राज्य पुलिस की एफआईआर को अपने केस के रूप में फिर से पंजीकृत करती है.एफआईआर को जांच के शुरुआती बिंदु के रूप में लेते हुए, केंद्रीय एजेंसी मामले की जांच करती है और अपने निष्कर्षों को एक अंतिम रिपोर्ट के रूप में एक विशेष अदालत को सौंपती है.
ईडी की रिपोर्ट में क्या था?
इससे पहले ईडी की रिपोर्ट में भूपेश बघेल पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. इसमें कहा गया था कि ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमोटरों ने बघेल को इस ऑनलाइन सट्टा ऐप के लाभार्थी के रूप में नामित किया है. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चंद्रभूषण वर्मा ने यह भी खुलासा किया है कि बघेल के ओएसडी और एक राजनीतिक सलाहकार को ऑनलाइन सट्टा ऐप के जरिए नियमित रूप से आय का भुगतान किया जा रहा था.

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