इस्तीफे के बाद अर्जुन राय BJP में शामिल, सियासी हलचल तेज
पटना:बिहार के राजनीतिक गलियारों में सोमवार को एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रीय जनता दल को अलविदा कहने के बाद सूबे के जाने-माने कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राजधानी पटना स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री नीतीश मिश्रा समेत कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
डबल इंजन सरकार से सीतामढ़ी के विकास का संकल्प
भाजपा में शामिल होने के बाद अपने संबोधन में अर्जुन राय ने कहा कि बतौर सांसद उन्होंने अपने गृह क्षेत्र सीतामढ़ी के विकास को लेकर जो सपने देखे थे, वे अब तक अधूरे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि केंद्र और राज्य में सक्रिय एनडीए की डबल इंजन सरकार के साथ मिलकर ही क्षेत्र के रुके हुए विकास कार्यों को पूरी गति दी जा सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि बिहार में इस समय सुशासन यानी गुड गवर्नेंस की सरकार पूरी मजबूती से काम कर रही है।
छात्र राजनीति से शुरू होकर मंत्री पद तक का सफर
अर्जुन राय का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है, जिसकी शुरुआत छात्र जीवन से हुई थी। साल 1994 में उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय के जरिए छात्र राजनीति में सक्रिय कदम रखा था। इसके बाद वर्ष 2000 में उन्होंने राजद के टिकट पर मुजफ्फरपुर की औराई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वर्ष 2005 में उन्होंने जदयू का दामन थामा और उसी वर्ष औराई से विधायक चुने गए, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उन्हें सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री बनाया गया।
सांसद बनने से लेकर राजद तक का राजनीतिक सफर
साल 2009 के आम चुनावों में उन्होंने जदयू के टिकट पर सीतामढ़ी लोकसभा सीट से शानदार जीत दर्ज कर संसद पहुंचे, हालांकि 2014 के चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2015 में वरिष्ठ नेता शरद यादव के साथ मिलकर राजद का हाथ थाम लिया था। राजद के बैनर तले उन्होंने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव भी लड़े, लेकिन सफलता न मिलने के बाद अब उन्होंने भाजपा का रुख किया है, जिससे क्षेत्र के सियासी समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

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