जर्मनी ने रचा इतिहास, WWII के बाद पहली बार सेना की स्थायी विदेशी तैनाती
जर्मनी: जर्मनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार जर्मनी के बाहर किसी और देश में अपने सैनिकों को तैनात किया है. दरअसल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के पूर्वी हिस्से की रक्षा में मदद करने के लिए लिथुआनिया में बर्लिन ब्रिगेड का उद्घाटन किया है. उन्होंने इसके लिए इस हफ्ते लिथुआनिया का दौरा किया है. गुरुवार, 22 मई को अपनी यात्रा में, चांसलर मर्ज जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ शामिल हुए. समारोह में आधिकारिक तौर पर जर्मनी की बख्तरबंद ब्रिगेड का गठन किया हुआ.
एक रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बीच, चांसलर मर्ज ने कहा कि बाल्टिक सहयोगियों की सुरक्षा भी "हमारी सुरक्षा है". उन्होंने नाटो के सहयोगी देशों से मॉस्को के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का विस्तार करने का भी आह्वान किया. चांसलर मर्ज ने कहा, अपनी सेना को मजबूत करके, बर्लिन ने सहयोगियों को सुरक्षा में और निवेश करने का संकेत दिया है. लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने इसे "ऐतिहासिक दिन" कहा, क्योंकि यह पहली बार था कि 1940 के दशक के बाद एक जर्मन ब्रिगेड लंबी तैनाती के लिए अपने क्षेत्र के बाहर आई है.
लिथुआनिया में जर्मन सैनिक
जर्मनी ने लिथुआनिया में अपने सैनिकों को तैनात किया है. बता दें कि लिथुआनिया की सीमा रूस के कलिनिनग्राद और मास्को के प्रमुख सहयोगी बेलारूस के साथ लगती है. अपनी नई ब्रिगेड के साथ, जर्मनी का लक्ष्य देश में गहन जुड़ाव का है, जहां इसने पहली बार 2017 में सैनिकों को ट्रांसफर करना शुरू किया था. यह एक वर्ष से अधिक समय से प्रगति पर था. बाद में इसका विस्तार एक "एक्टिवेशन स्टाफ" के रूप में हुआ, जिसमें लास्ट फॉल के दौरान 250 लोग शामिल थे. 45 बख्तरबंद ब्रिगेड, नवीनतम भारी लड़ाकू इकाई, की कुल ताकत लगभग 5,000 की होगी- इसमें 200 नागरिक कर्मचारियों के साथ 4,800 जर्मन सैनिक शामिल होंगे. इसके 2027 तक अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने की उम्मीद है. गुरुवार को विनियस के सेंट्रल कैथेड्रल स्क्वायर के ऊपर आसमान में दर्जनों सैन्य हेलीकॉप्टर गरजते देखे गए.
रक्षा रणनीति
जर्मन चांसलर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि देश "अपने सशस्त्र बलों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है." 2022 में यूक्रेन पर रूस के फुल स्केल के आक्रमण के बाद, पूर्व जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने अपने रक्षा खर्च को जीडीपी के 2% के नाटो लक्ष्य तक बढ़ाने की बात की. उन्होंने बुंडेसवेहर के आधुनिकीकरण के लिए 113 अरब डॉलर का विशेष कोष भी आधिकारिक तौर पर बनाया. जनवरी में, लिथुआनिया ने 2026 की शुरुआत से अपने रक्षा खर्च को 3% से थोड़ा अधिक बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद के 5% और 6% के बीच कर दिया.

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