जैन धर्मावलंबियों पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू करने के मामले में हाईकोर्ट 5 मई को सुनाएगा फैसला
इंदौर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को तलाक के मामलों में हिंदुओं की तरह जैनियों पर भी हिंदू विवाह अधिनियम लागू करने को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली और कहा कि इस पर फैसला 5 मई को सुनाया जाएगा। जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस संजीव एस कलगांवकर की बेंच जैन दंपती की तलाक याचिका का निपटारा हिंदू विवाह अधिनियम के बजाय विशेष विवाह अधिनियम के तहत करने के फैमिली कोर्ट के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
फैमिली कोर्ट में सुनवाई
फैमिली कोर्ट ने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट में पति-पत्नी दोनों पक्षों के वकीलों ने दलील दी कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-2 में साफ तौर पर कहा गया है कि यह अधिनियम हिंदुओं के अलावा सिख, बौद्ध और जैन पर भी लागू होगा। एडवोकेट पंकज खंडेलवाल के मुताबिक कोर्ट में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 25 में भी स्पष्ट किया गया है कि जैन, सिख और बौद्ध हिंदू माने जाएंगे।
जैन धर्म में भी हिंदुओं की तरह ही विवाह संस्कार
पत्नी की ओर से अधिवक्ता वर्षा गुप्ता ने कहा कि विवाह के लिए जैन धर्म में भी हिंदुओं की तरह ही वकदान, सप्तपदी आदि सभी नियम बताए गए हैं। अधिवक्ता सुनील जैन और रोहित कुमार मंगल ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जैन समुदाय को वर्ष 2014 में अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया था, इसकी अधिसूचना में केवल आरक्षण संबंधी प्रावधान हैं।

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